| उत्तराखण्ड का जनपद चम्पावत/District Champawat of Uttarakhand |
चम्पावत जनपद का इतिहास
- चम्पावत जिले का गठन 15 सितम्बर 1997 ई० को हुआ
- चम्पावत की स्थापना प्रथम चंदवंशीय राजा सोमचंद ने की डोटी के मल्ल राजा वामदेव ने अपनी राजधानी चम्पा बनायी
- 1000 ई0 से 1563 ई० तक चंदवंश के शासको की राजधानी चम्पावत थी
- चम्पावत में राजबुंगा का किला सोमचंद ने बनाया था
- सोमचंद ने मल्ल राजाओं के अधीन रहकर राजकाज चलाया
- गौल्ला चौड किला भी चम्पावत में स्थित है चम्पावत के कानदेव पर्वत पर भगवान विष्णु का कुर्मावतार हुआ था।
- चम्पावत का प्राचीन नाम कुमुं है
- 1872 ई० को चम्पावत तहसील का दर्जा दिया गया
- चम्पावत गड़कीगाड व चम्पावती नदी के संगम पर है, चम्पावती नदी के नाम पर चम्पावत नाम पड़ा
चम्पावत जनपद की भौगोलिक स्थिति
- चम्पावत जिले का क्षेत्रफल 1,766 वर्गकिमी है
- क्षेत्रफल की दृष्टि से राज्य का सबसे छोटा जिला है चम्पावत की सीमांए 4 जिलो से लगती है, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल व ऊधमसिंह नगर
- चम्पावत जिले की सीमा नेपाल से लगती है
चम्पावत जनपद का प्रशासन
- चम्पावत जिले में विधानसभा क्षेत्र - 2 चम्पावत जिले में विकासखण्ड - 4
- चम्पावत जिले में तहसील- 5
- चम्पावत में नगरपालिका 2 चम्पावत जिले की जनसंख्या 2,59,648 है
- चम्पावत जिले का जनघनत्व- 147 चम्पावत की साक्षरता दर- 79.83%
- चम्पावत जिले का लिंगानुपात- 980
- चम्पावत जनपद की नदियां/ताल/झील लधिया नदी चूका, चम्पावत नामक स्थल पर काली नदी से मिलती है, चम्पावत में गंडक व पनार नदी भी बहती है
- चम्पावत में बहने वाली लोहावती नदी तीन धाराओं से मिलकर बनी हुई है
- कोटा गांव चम्पावत में कोइराला नदी बहती है श्यामला ताल चम्पावत जिले में स्थित है, इस ताल में सफेद रंग के कमल खिलते है,
- श्यामला ताल के तट पर विवेकानंद आश्रम है यहां श्यामला ताल के तट पर झूला मेला लगता है।
- स्वामीताल व सूखाताल चम्पावत जिले में है
- चम्पावत जिले में स्थित झिलमिल ताल की आकृति गोल है
- कौलीटेक झील चम्पावत में निर्मित की जा रही है
- चम्पाबत जिले में प्रमुख पर्यटक स्थल नौ ढुंग्गाघर चम्पावत में है, इस मकान में किसी कोने से गिनने पर 9 ही पत्थर मिलते है
- बाणासुर किला चम्पावत में है, स्थानीय नाम मारकोट है बाराकोट किला चम्पावत में 12 कोटो से मिलकर बना हुआ है
- राजबुंगा किला चंपावत में सोमचंद द्वारा बनाया गया माउंट एबॉट चर्च चम्पावत में है
- रामकृष्ण शांतिमठ की स्थापना 1901ई0 में स्वामी विवेकानंद ने चम्पावत में की थी
टनकपुर
- टनकपुर का प्राचीन नाम ग्रास्टिगंज है टनकपुर नेपाल सीमा पर जहां बरमदेव मंडी थी बरमदेव मंडी का निर्माण कत्यूरियों ने किया
- 1880ई0 में शारदा नदी के बाढ़ में बरमदेव मंडी बह गयी
- टनकपुर पूर्णागिरी मंदिर का प्रवेश द्वार है 1890ई0 में अंग्रेज पर्यटक टलक एवं हसी इस क्षेत्र में यहीं अपने बंगले बनवाए आए, और टनकपुर को बसाने का श्रेय मि० टाल्क को जाता है
पर्यटक स्थल लोहाघाट
- लोहाघाट, चम्पावत के लोहावती नदी के तट पर है
- पुराणों में लोहाघाट को लोहार्गल कहा जाता है
- कत्यूरी राज में लोहाघाट को सुई नाम से जाना जाता था
- बाणासुर का किला लोहाघाट, चम्पावत में है
- ऋषेश्वर महादेव मंदिर लोहाघाट में आस्था का केन्द्र है
- मानेश्वर मंदिर राजा निर्भयचंद ने लोहाघाट में बनाया
- सूखीढांग क्षेत्र लोहाघाट में है, जो अचार के लिए प्रसिद्ध है
मायावती आश्रम चम्पावत
- मायावती आश्रम का सम्बन्ध स्वामी विवेकानंद से है
- मायावती आश्रम रामकृष्ण मिशन की एक शाखा है मायावती आश्रम की स्थापना 19 मार्च 1899 ई0 में हुयी
- मायावती आश्रम को बनाने मे मुख्य भूमिका एच. सेवियर की रही
- स्वामी विवेकानंद 3 जनवरी 1901 ई0 को मायावती आश्रम आए और 15 दिन तक रहे,
- मायावती आश्रम में धमार्थ अस्पताल की स्थापना 1903 ई० में की गयी
- मायावती आश्रम के प्रथम प्रमुख स्वामी स्वरूपानंद बने
चम्पावत जनपद में प्रसिद्ध मंदिर
- हिंगला देवी मंदिर चम्पावत जिले में है, इस मंदिर के भीतर फीट लम्बी कुर्मशिला है
- नृसिंह देवता का मंदिर चम्पावत जिले में है चम्पावती नामक गाड़ में सात प्राचीन मंदिर है जिन्हें सप्तेश्वर मंदिर कहा जाता है,
- घटोत्कच मंदिर चम्पावत में है
- चम्पावत के देवीधुरा में वराही देवी का मंदिर है
- पंचेश्वर काली व सरयू नदी के तट पर स्थित धाम लोहाघाट में है पंचेश्वर में चामू या चौमुह देवता का मंदिर है, चौमूह देवता को पशुरक्षक माना जाता है चम्पावत में मीठा- रीठा साहिब गुरुद्वारा है
- पूर्णागिरी मंदिर चम्पावत के टनकपुर में स्थित है झूठा मंदिर चंपावत में स्थित है
- हिडिम्बा देवी का मंदिर चम्पावत में स्थित है
- तारकेश्वर मंदिर, आदित्य मंदिर भी चम्पावत में स्थित है
- गुरना माई मंदिर चम्पावत में स्थित है।
- खेतीखान सूर्य मंदिर चम्पावत जिले में है
- खेतीखान सूर्य मंदिर में ही दीप महोत्सव का आयोजन होता है
बालेश्वर महादेव मंदिर
- बालेश्वर मंदिर चंद राजाओं ने 10-12वीं सदी में जगन्नाथ मिस्त्री की मदद से यह मंदिर बनवाया था चंद राजाओं ने मंदिर निर्माण के बाद वास्तुकार जगन्नाथ मिस्त्री के हाथ काट दिए थे।
- बालेश्वर मंदिर के परिसर में चम्पावती देवी और रत्नेश्वर मंदिर है। जिस पर गुजरात-राजस्थान शैली या बेसर शैली का प्रभाव है
- बालेश्वर मंदिरों को 1952 ई० में राष्ट्रीय धरोहर स्मारक घोषित किया गया है। एक हथिया नौला चम्पावत में इसका निर्माण जगन्नाथ मिस्त्री ने अपनी बेटी कस्तूरी की मदद से बनाया था,
- एक हथिया नौला का निर्माण कर मिस्त्री ने चंद राजाओं का घमण्ड तोडा था। एक हाथ से निर्मित होने के कारण एक हथिया नौला या बावली नाम पड़ा
चम्पावत जिले के प्रमुख त्योहार/मेला
- लड़ीघूरा मेला चम्पावत के पदमा देवी के मंदिर में लगता है
- लडीधूरा मेले मे 2013 से फलों व फूलों से बग्वाल मनाया जाता है।
- मानेश्वर मेला चम्पावत में मायावती आश्रम के पास लगता है
- मानेश्वर मेले में दुधारू पशुओं के लिए पूजा की जाती है
- गोरा अठ्ठावली चम्पावत में राजी जनजाति का त्योहार है
- श्री पूर्णागिरी मेला चम्पावत में चैत्र नवरात्र को लगता है
- हरेश्वर का मेला चम्पावत में लोहावती नदी के तट पर लगता है
- शिलादेवी मेला चम्पावत जिले में पाटी के पास लगता है
- ब्यानधुरा मेला चम्पावत के टनकपुर के पास ऐड़ी देवता का प्रसिद्ध स्थान है
- फटकशिला का मेला चम्पावत के लोहाघाट में लगता है।
- चैतोल मेला चम्पावत में चैत्र अष्टमी को लगता है
- कालसिन का मेला चम्पावत श्यामलाताल क्षेत्र में लगता है।
- झूला देवी का मेला चम्पावत क्षेत्र में लगता है कंडाई देवी का मेला लोहाघाट में लगता है आदित्य देव साठी का मेला चम्पावत के पाटी में लगता है
चम्पावत जनपद में प्रमुख व्यक्ति
कालू सिंह महरा
- कालू सिंह महरा का जन्म 1831 ई० में चम्पावत के बिसुंग ग्राम में के हुआ जो उत्तराखण्ड के प्रथम स्वतन्त्रता सेनानी थे, इन्होंने 1857 ई० प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान क्रांतिवीर नामक गुप्त संगठन चलाया था
- कालू सिंह को गुप्त संगठन चलाने के लिए अवध के नबाव वाजिद अली ने आमंत्रित किया था
हर्षदेव औली
- हर्षदेव औली को काली कुमाऊँ का शेर कहा जाता है इनका जन्म चम्पावत के खेतीहान में 1890 ई0 को हुआ
- 1929 ई० में लाहौर कांग्रेस सम्मेलन में कुमाऊँ क्षेत्र का प्रतिनिधित्व हर्षदेव औली ने किया था
- 1930ई0 में जंगलात कानून के विरूद्व सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाया। खेतीहान में इनकी स्मृति में सेनानी पार्क का निर्माण किया गया
- अंग्रेज हर्षदेव औली को उत्तराखण्ड का मुसोलिनी कहते थे
चम्पावत जनपद में ऊर्जा संसाधन
- शारदा नहर चम्पावत के बनबसा से निकाली गई है
- शारदा नहर का निर्माण काली नदी पर 1928 ई० में हुआ
- टनकपुर परियोजना 1993 ई0 से शारदा नदी पर है
- सप्तेश्वर जल विधुत परियोजना शारदा नदी पर है
- गौरी डैम चम्पावत में है
चम्पावत जनपद अन्य महत्वपूर्ण बिन्दु
- लासपा दर्रा चम्पावत व पिथौरागढ़ के बीच है पाताल रूद्रेश्वर गुफा चम्पावत में है इस गुफा की खोज 1993 में 14 वर्षीय बालक ने की थी
- सबसे कम ग्राम पंचायतों वाला जिला चम्पावत है
- रूकमणि नौला चम्पावत में स्थित है मारकोट का किला जिसे बाणासुर किला कहा जाता है
- झिनझाड़ ताम्रपात्र चम्पावत में मिले
- हिडिम्बा आश्रम भी चम्पावत में स्थित है
- गोलचौडा किला चम्पावत में स्थित है
- रण व बराह शिला देवीधुरा में वराही मंदिर के पास स्थित है
- रण शिला को भीम शिला भी कहा जाता है रानी का चबूतरा चम्पावत में स्थित
- ऐबट पर्वत चम्पावत में स्थित है
- जनजातीय आस्था का केन्द्र घटकू चम्पावत में है
- ऐडी देवता चम्पावत में हर घर में पूजा जानेवाला देवता है, इसे धनुष-बाण वाला देवता भी कहा जाता है।
विधानसभा- 2
1. लोहाघाट2. चम्पावत
तहसील- 5
1. पाटी2. पूर्णागिरी3. लोहाघाट4. बाराकोट5. चम्पावत
विकासखण्ड- 4
1. पाटी2. बाराकोट3. लोहाघाट4. चम्पावत

Follow Us